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 जहाँ सामूहिक आत्महत्या करने आते हैं पक्षी

जिंदगी और मौत के रहस्य को जितना अधिक सुलझाने का प्रयास किया जाता है, वह उतना ही उलझता जाता है। इसमें हैरानी की बात यह है कि इस जिंदगी और मौत के जाल में इंसान ही नहीं जानवर भी उलझे हुए हैं। आपको थोड़ी हैरानी हो रही होगी किा भला पक्षी आत्म हत्या कैसे कर सकते हैं। लेकिंन यह बातें सिर्फ आपको ही हैरान नहीं करती हैं बल्कि उन्हें भी हैरत में डाले हुए है जहां वर्षों से यह सिलसिला चला आ रहा है
अगर आप सोच रहे हैं किं यह विदेश की घटना होगी तो ऐसा नहीं है। यह सब कुछ भारत में होता है। भारत के उत्तर पूर्वी राज्य असम में एक घाटी है जिदसे जटिंगा वैली (जतिंगा वैली) कहते हैं। यहां जाने पर आपको पक्षिसयों के आत्म हत्या करने का नजारा खुद दिख जाएगा।

चारो तरफ से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरी जाटिंगा वैली की प्राकृतिक खूबसूरती कुछ इस कदर है जैसे यह धरती नहीं किसी और लोक की जगह है। इस घाटी में हर साल हजारों प्रवासी पक्षी हर साल आकर खुदकुशी कर लेते हैं। यह सिलसिला सदियों से जारी है और पक्षी विज्ञानियों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं
गुवाहाटी से जतिंगा 330 किमी दूर है। यहां परिंदों के जान देने का दृश्य देखकर सिहर उठेंगे आप। जतिंगा बर्ड सेंचुरी बाकी बर्ड सेंचुरी से इसलिए ही एकदम अलग है।
हर साल बड़ी संख्या में यहां पक्षी आत्महत्या कर लेते हैं। खासकर हर साल सितंबर से नवंबर महीने के बीच यहां पक्षियों की आत्महत्याएं ज्यादा होती हैं। ऐसा शाम सात से रात के दस बजे के बीच होता है।
हैरत की बात ये है कि पक्षी सामूहिक आत्महत्या करते हैं। देखने वाले कहते हैं कि एक रोशनी की ओर झुंड के झुंड पक्षी आते हैं और देखते ही देखते काल के गाल में समा जाते हैं।

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